आठ राज्यों के 250 से अधिक प्रतिभागी लेंगे हिस्सा
देहरादून। एसजीआरआर विश्वविद्यालय में अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ, स्कूल ऑफ बेसिक एंड एप्लाइड साइंस द्वारा 21-22 मार्च को आयोजित दो दिवसीय ‘‘बायोटेक फ्रंटियर्स 2025‘‘ अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की विधिवत शुरूआत की गई।
इस सम्मेलन का मुख्य विषय “इमर्जिंग ट्रेंड्स इन बायोटेक्नोलॉजी एंड माइक्रोबायोम रिसर्च” है। इस दो दिवसीय सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिक, शोधकर्ता और विशेषज्ञ भाग लेंगे और जैव प्रौद्योगिकी व सूक्ष्म जीवविज्ञान के क्षेत्र में नवीनतम अनुसंधान और प्रगति पर चर्चा करेंगे। इस दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों, शोध प्रस्तुतियों और पोस्टर प्रेजेंटेशन का आयोजन किया गया।
डिपार्टमेंट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड, यूसर्क उत्तराखंड, अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाऊंडेशन भारत सरकार द्वारा प्रायोजित इस सम्मेलन के मुख्य विषय नैनो टेक्नोलॉजी और नैनो मेडिसिन ड्रग डिस्कवरी एंड थेरेपी, माइक्रोबायोम रिसर्च, माइक्रोबॉयल टेक्नोलॉजी, एनवायरमेंटल साइंस, प्लांट एंड एग्रीकल्चर बायोटेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल बायोटेक्नोलॉजी, एडवांस्ड इन स्टीम सेल रिसर्च एंड कैंसर बायोलॉजी, नेचुरल रिसोर्सेस फॉर हेल्थकेयर केयर रहे।
इस अवसर पर श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट श्री मंहत देवेंद्र दास जी महाराज ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को शुभकामनाएं प्रेषित की।
कार्यक्रम की शुरुआत श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो डॉ कुमुद सकलानी, विश्वविद्यालय प्रेसिडेंट सलाहकार डॉ जेपी पचौरी, रजिस्ट्रार डॉ लोकेश गंभीर, मुख्य अतिथि डॉ गौरव शर्मा और डॉ निपेंद्र चौहान के द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। मुख्य अतिथियों की उपस्थिति में सम्मेलन के उद्घाटन सत्र का प्रमुख आकर्षण ‘‘शोध संदर्भ पुस्तिका’ का विमोचन रहा।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डाॅ. कुमुद सकलानी ने कहा, ‘‘यह सम्मेलन उभरते वैज्ञानिक रुझानों और नवाचारों को समझने तथा शोधकर्ताओं को आपस में संवाद का मंच प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह सम्मेलन जैव प्रौद्योगिकी, औद्योगिक सूक्ष्म जीवविज्ञान, पर्यावरणीय जैव प्रौद्योगिकी, नैनो बायोटेक्नोलॉजी और बायोइन्फॉर्मेटिक्स जैसे विषयों पर केंद्रित रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई है कि यह आयोजन जैव प्रौद्योगिकी और सूक्ष्म जीवविज्ञान अनुसंधान में नए आयाम स्थापित करेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि शोध में नैतिकता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अतः छात्रों को विज्ञान के अनुसंधान को समाज के लिए उपयोगी बनाते समय नैतिकता और सामाजिक मूल्यों का ध्यान रखना चाहिए।
सम्मेलन के संयोजक एवं विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. लोकेश गंभीर ने जैव प्रौद्योगिकी और सूक्ष्म जीवविज्ञान अनुसंधान के भविष्य और इसकी संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि इस तरह के सत्र युवा शोधकर्ताओं को नए दृष्टिकोण और वैज्ञानिक नवाचारों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। साथ ही जानकारी देते हुए बताया कि श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में आठ राज्यों के 94 शोध पत्र में 95 पोस्टर के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त विषय विशेषज्ञ भी व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि डॉ गौरव शर्मा, आफिसर इंचार्ज, जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया देहरादून रहे। वहीं विशिष्ट अतिथि के तौर पर डॉ नृपेन्द्र चौहान, डायरेक्टर सेंटर फॉर अरोमैटिक प्लांट्स गवर्नमेंट ऑफ उत्तराखंड देहरादून रहे।
उद्घाटन सत्र के अंत में, डॉ. गिरीश चंद्र, आयोजन सचिव ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का इस महत्वपूर्ण सम्मेलन को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया। उद्घाटन सत्र का मंच संचालन डॉ श्रेया कोटनाला द्वारा किया गया।
सेमिनार के पहले सत्र में ‘‘स्टेम सेल रिसर्च और कैंसर बायोलॉजीः स्वास्थ्य देखभाल के लिए प्राकृतिक संसाधन‘‘ विषय पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. डॉ पुनीत ओहरी ने की। सत्र का संयोजन डॉ कमला ध्यानी द्वारा किया गया। सत्र के दौरान प्रो. डॉ. पंकज गर्ग, प्रोफेसर और प्रमुख, कैंसर सर्जरी विभाग, श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज द्वारा पहला व्याख्यान दिया गया। उन्होंने स्टेम सेल रिसर्च और कैंसर बायोलॉजी के क्षेत्र में नवीनतम शोध और उपचार पद्धतियों पर प्रकाश डाला।
इसके बाद, डॉ. प्रमोद कुमार, वैज्ञानिक-एफ, आरएमसी, टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, बीएआरसी इंडिया ने दूसरे व्याख्यान मैं ट्यूबरक्लोसिस और उससे होने वाली परेशानियों उसके कारण और प्रभाव पर वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए उनके द्वारा किए गए शोध पर व्याख्यान प्रस्तुत किया ।
इस सत्र में देशभर के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया और उन्नत चिकित्सा अनुसंधान के नए आयामों पर चर्चा की। विशेषज्ञों का मानना रहा कि स्टेम सेल रिसर्च और कैंसर बायोलॉजी में हो रहे नवीनतम विकास, भविष्य में चिकित्सा विज्ञान के लिए क्रांतिकारी साबित होंगे।
सम्मेलन में उपस्थित शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने इन महत्वपूर्ण विषयों पर अपने शोध पत्र भी प्रस्तुत किए और जैव प्रौद्योगिकी में नए अवसरों को लेकर गहन चर्चा की। इस ऑफलाइन सत्र का संचालन डॉ. अर्चना ध्यानी ने किया। इस सत्र की अध्यक्षता डॉक्टर प्रमोद कुमार बीएआरसी मुंबई द्वारा की गई।
जबकि ऑनलाइन सत्र की मॉडरेशन की जिम्मेदारी डॉ. शालिनी तिवारी ने निभाई। सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर डॉक्टर कीर्ति सिंह द्वारा की गई। इस दौरान शोधकर्ताओं ने जैव प्रौद्योगिकी, सूक्ष्म जीवविज्ञान, कैंसर बायोलॉजी, औषधीय पौधों और स्वास्थ्य देखभाल में प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित अपने नवीनतम अनुसंधान कार्य प्रस्तुत किए।
शोध प्रस्तुतियों के बाद प्रतिभागियों और विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श हुआ, जिसमें शोध की संभावनाओं, व्यावहारिक अनुप्रयोगों और भविष्य की दिशा पर चर्चा की गई। यह सत्र सम्मेलन के मुख्य आकर्षणों में से एक रहा और इसमें प्रतिभागियों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया।
सेमिनार के प्रथम दिन ‘‘ड्रग डिस्कवरी और थेरेप्यूटिक्स, फार्मास्युटिकल बायोटेक्नोलॉजी‘‘ विषय पर दूसरे तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. विजय जुआल ने की, जबकि सत्र का संचालन डॉ. सुभाष चंद्र ने किया। सत्र के दौरान तीन महत्वपूर्ण प्लेनरी व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। इनमें डॉ. राजेश कालरा, आईआईटी रुड़की ने नवीनतम दवा खोज तकनीकों पर चर्चा की और आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग से नई औषधियों के विकास की संभावनाओं को रेखांकित किया। वहीं प्रो. हेनरिक डी. एम. कौटिन्हो, यूनिवर्सिटी ऑफ कारिरी, क्रेटो, ब्राजील ने फार्मास्युटिकल बायोटेक्नोलॉजी में नवीनतम अनुसंधान और वैश्विक स्तर पर इसके प्रभावों पर अपने विचार साझा किए। इसी क्रम में डॉ. देवरथ त्रिपाठी, बीएआरसी, मुंबई ने रेडियो फार्मास्युटिकल्स और कैंसर थेरेपी में आधुनिक तकनीकी के महत्व पर चर्चा की।
इस सत्र में शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने नवीन दवा विकास, औषधीय जैव प्रौद्योगिकी और चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में नवीनतम रुझानों पर भी गहन चर्चा की।
सेमिनार के दूसरे सत्र में ऑफलाइन प्रस्तुति सत्र की अध्यक्षता प्रो. डॉ. दिव्या जुयाल ने की, जबकि सत्र का संचालन डॉ. सुभाष चंद्र ने किया। इस सत्र में विभिन्न शोधकर्ताओं ने जैव प्रौद्योगिकी, औषधीय विज्ञान, कैंसर बायोलॉजी और सूक्ष्म जीवविज्ञान से संबंधित अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए। वहीं, ऑनलाइन मौखिक प्रस्तुति सत्र की अध्यक्षता प्रो. गौरव शर्मा, एसजीवीयू, जयपुर ने की, और इस सत्र का संचालन अजय सिंह बिष्ट ने किया। इस ऑनलाइन सत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं ने स्वास्थ्य देखभाल, जैव प्रौद्योगिकी, पर्यावरण विज्ञान और फार्मास्युटिकल बायोटेक्नोलॉजी से जुड़े अपने शोध कार्य साझा किए।
सेमिनार के प्रथम दिन पोस्टर प्रेजेंटेशन का भी आयोजन किया गया, जिसमें ऑफलाइन सत्र की अध्यक्षता प्रो. डॉ. मनीष कुमार मिश्रा ने की। जबकि ऑनलाइन सत्र की अध्यक्षता डॉ. श्वेता साहनी, डॉ. मंजूषा त्यागी ने की और संचालन संस्कृति नेगी एवं कविता द्वारा किया गया।
इस अवसर पर स्कूल आफ बेसिक एंड एप्लाइड साइंसेज के डीन प्रो डॉ अरुण कुमार के साथ, आईआईसी निदेशक प्रो डॉ द्वारिका प्रसाद मैथानी के साथ सभी स्कूलों के डीन, विभाग अध्यक्ष, शिक्षकों के साथ सैकड़ो छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।


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